श्री गणपती स्तोत्र

विकिबुक्स कडून
येथे जा: सुचालन, शोध


== श्री गणपतिस्त्रोतम् ==
=== ।। श्री गणेशायनमः ।। ===
==== ।।नारद उवाच ।। ====


प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् ।। भक्तावासं स्मरेत्रित्यमायुः सर्वकामार्थसिद्वये ।।1।।

प्रथमं वक्रतुंड च एकदन्तं द्वितीयकम्। तृतीयं कृष्णपिंगाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम्।। 2।।

लंबोदरं पंचमं च षष्ठं विकटमेव च। सप्तमं विघ्न राजेन्द्रं धूम्रवर्णम् तथाष्टमम्।। 3।।

नवमं भालचंद्रं च दशमं तु विनायकम्। एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम्।। 4।।

द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं यः पठेन्नरः। न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्वकरं प्रभो।। 5।।

विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम्। पुत्रार्थी लभते पुत्रान मोक्षार्थी लभते गतिम्।। 6।।

जपेत गणपतिस्तोत्रं षड् भिर्मासैः फलं लभेत्। संवत्सरेण सिद्विं च लभते नात्र संशयः।। 7।।

अष्टभ्यो ब्राम्हाणेभ्यश्च लिखित्वा यः समर्पयेत्। तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः।। 8।।

इति श्री नारदपुराणे संकष्ट नाशनं नाम श्री गणपतिस्तोत्रं संपूर्णम्।।


।। प्रार्थना ।।[संपादन]

विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लम्बोदराय सकलाय जगद्धिताय नागाननाय श्रुतियज्ञ विभूषिताय गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते।।1।।

नमस्ते ब्रम्हरूपाय विष्णुरूपायते नमः। नमस्ते रूद्ररूपाय करिरूपायते नमः।।2।।

विश्वरूप-स्वरूपाय नमस्ते ब्रम्हचारिणे। भक्तप्रियाय देवाय नमस्तुभ्यं विनायक।। 3।।

लम्बोदरं। नमस्तुभ्यं सततं मोदकप्रियं। निर्विघ्नं कुरू मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।। 4।।

त्वां विघ्नशत्रुदलनेति च सुन्दरेति। भक्तप्रियेति सुखदेति फलप्रदेती।। 5।।

विद्याप्रदेत्यघहरेति च ये स्तुवन्ति। तेभ्यो गणेश। वरदो भव नित्यमेव।। 6।।


|| श्री गणपती स्तोत्र ||[संपादन]

जय जयाजी गणपती | मज द्यावी विपुल मती | करावया तुमची स्तुती | स्पुर्ती द्यावी मज अपार || ०१ ||

तुझे नाम मंगलमूर्ती | तुज इंद्र-चंद्र ध्याती | विष्णू शंकर तुज पूजिती | अव्यया ध्याती नित्य काळी || ०२ ||

तुझे नाव विनायक | गजवदना तू मंगल दायक | सकल नाम कलिमलदाहक | नाम-स्मरणे भस्म होती || ०३ ||

मी तव चरणांचा अंकित | तव चरणा माझे प्रणिपात | देवधीदेवा तू एकदंत | परिसे विज्ञापना माझी || ०४ ||

माझा लडिवाळ तुज करणे | सर्वापरी तू मज सांभाळणे | संकटामाझारी रक्षिणे | सर्व करणे तुज स्वामी || ०५ ||

गौरी पुत्र तू गणपती | परिसावी सेवकाची विनंती | मी तुमचा अनन्यार्थी | रक्षिणे सर्वार्थेची स्वामिया || ०६ ||

तूच माझा माय बाप | तूच माझा देवराय | तूच माझी करिशी सोय | अनाथ नाथा गणपती || ०७ ||

गजवदना श्री लम्बोदरा | सिद्धीविनायका भालचंद्रा | हेरंभा शिव पुत्रा | विघ्नेश्वरा अनाथ बंधू || ०८ ||

भक्त पालका करि करुणा | वरद मूर्ती गजानना | परशुहस्ता सिंदुरवर्णा | विघ्ननाशना मंगलमूर्ती || ०९ ||

विश्ववदना विघ्नेश्वरा | मंगलाधीषा परशुधरा | पाप मोचन सर्वेश्वरा | दिन बंधो नाम तुझे ||१० ||

नमन माझे श्री गणनाथा | नमन माझे विघ्नहर्ता | नमन माझे एकदंता | दीनबंधू नमन माझे || ११ ||

नमन माझे शंभूतनया | नमन माझे करुणांलया | नमन माझे गणराया | तुज स्वामिया नमन माझे || १२ ||

नमन माझे देवराया | नमन माझे गौरीतनया | भालचंद्रा मोरया | तुझे चरणी नमन माझे || १३ ||

नाही आशा स्तुतीची | नाही आशा तव भक्तीची | सर्व प्रकारे तुझिया दर्शनाची | आशा मनी उपजली || १४ ||

मी मूढ केवल अज्ञान | ध्यानी सदा तुझे चरण | लंबोदरा मज देई दर्शन | कृपा करि जगदीशा || १५ ||

मती मंद मी बालक | तूच सर्वांचा चालक | भक्तजनांचा पालक | गजमुखा तू होशी || १६ ||

मी दरिद्री अभागी स्वामी | चित्त जडावे तुझिया नामी | अनन्य शरण तुजला मी | दर्शन देई कृपाळुवा || १७ ||

हे गणपती स्तोत्र जो करी पठण | त्यासी स्वामी देईल अपार धन | विद्या सिद्धी चे अगाध ज्ञान | सिंदूरवदन देईल पै || १८ ||

त्यासी पिशाच भूत प्रेत | न बाधिती कळी काळात | स्वामीची पूजा करोनी यथास्थित | स्तुती स्तोत्र हे जपावे || १९ ||

होईल सिद्धी षड्मास हे जपता | नव्हे कदा असत्य वार्ता | गणपती चरणी माथा | दिवाकरे ठेविला || २० ||

|| इति श्री गणपती स्तोत्र संपूर्ण ||